नई दिल्ली। भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत दोनों देशों के बीच कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में किया जा सकेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
साने ताकाइची आज तीन दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की तैयारी
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत और जापान के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए औपचारिक व्यवस्था स्थापित होगी। इसके तहत दोनों देशों की कंपनियां अमेरिकी डॉलर के बजाय सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में भुगतान कर सकेंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना और दोनों देशों के बीच लेनदेन को अधिक सरल बनाना है।
स्पेशल अकाउंट के जरिए होगा भुगतान
प्रस्ताव के अनुसार जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी। इन खातों के माध्यम से कंपनियां सीधे रुपए और येन में भुगतान और लेनदेन कर सकेंगी।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद व्यापारिक भुगतान के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की आवश्यकता नहीं रहेगी। दोनों देशों के बीच भुगतान सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जाएगा।
व्यापार की लागत होगी कम
स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था लागू होने से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पैसे भेजने की लागत भी घटेगी और भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी।
दोनों देशों का मानना है कि इससे व्यापार करना आसान होगा। कंपनियों का समय बचेगा और लेनदेन की लागत कम होने से कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा।
2025 में बनी थी सहमति
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में दोनों देशों के बीच पहले भी सहमति बन चुकी है।
अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान भारत और जापान ने अगले दस वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। इस दस्तावेज में भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
अब उसी योजना को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश इसे लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वित्त मंत्रालय और RBI के बीच होगा सहयोग
रिपोर्ट के अनुसार जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC) करने की तैयारी में है।
इस समझौते का उद्देश्य स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच नई भुगतान व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करना है।
भारत पहले ही कर चुका है पहल
भारत पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहा है।
जुलाई 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य दूसरे देशों के साथ भारतीय रुपए में व्यापार को आसान बनाना था।
बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया। इसके तहत विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त राशि को भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई।
कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान केवल व्यापारिक भुगतान व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी।
दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने, रक्षा सहयोग मजबूत करने, सेमीकंडक्टर उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल सेक्टर, सप्लाई चेन को मजबूत करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दे बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।
प्रधानमंत्री साने ताकाइची का यह भारत दौरा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दौरे के दौरान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार से जुड़ी व्यवस्था को लेकर औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
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