भोपाल में पूज्य संत नीब करौरी बाबा जी को समर्पित विश्व रिकॉर्ड टाइपोग्राफिक कलाकृति परियोजना का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर नीब करौरी बाबा जी के पौत्र श्री धनंजय शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम आस्था, कला और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के समन्वय का साक्षी बना।

इस विशेष कलाकृति का निर्माण अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार एवं अनेक विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले इंद्रनील मजूमदार के नेतृत्व में किया गया है। इस परियोजना में सहयोगी कलाकार देवलीना मजूमदार, अनुजा पाटीदार और देवादित्य घोष ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

30 फीट × 30 फीट आकार की इस विशाल टाइपोग्राफिक कलाकृति में पवित्र शब्द "राम" को हजारों बार कलात्मक ढंग से लिखकर पूज्य नीब करौरी बाबा जी का दिव्य स्वरूप उकेरा गया है। यह परियोजना केवल एक कलात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति को समर्पित एक विशेष प्रयास है। इसका उद्देश्य बाबा की शिक्षाओं और सेवा-भाव को कला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कलाकृति का शुभारंभ करते हुए कलाकारों के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों ने भी इस अनूठी रचना को श्रद्धा और सम्मान के साथ देखा।

कलाकृति के मुख्य कलाकार इंद्रनील मजूमदार ने कहा कि यह प्रयास केवल विश्व रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से नहीं किया गया, बल्कि यह उनकी आस्था और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बताया कि श्री धनंजय शर्मा के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने श्रद्धा, समर्पण और बारीकी के साथ इस परियोजना को पूरा किया। साथ ही विश्व रिकॉर्ड के सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण भी किया गया है।

नीब करौरी बाबा, जिन्हें उनके श्रद्धालु स्नेहपूर्वक "महाराजजी" के नाम से भी जानते हैं, भगवान हनुमान के परम भक्त माने जाते हैं। उनकी शिक्षाएं प्रेम, सेवा, करुणा, सत्य और ईश्वर के नाम-स्मरण पर आधारित थीं। उत्तराखंड स्थित कैंची धाम सहित उनके कई आश्रम और मंदिर आज भी देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

भोपाल में शुरू की गई यह विश्व रिकॉर्ड टाइपोग्राफिक कलाकृति परियोजना बाबा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ उनकी सेवा और भक्ति के संदेश को कला के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुंचाने का प्रयास है। "राम" नाम के हजारों लेखनों से निर्मित यह भव्य स्वरूप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, श्रद्धा और रचनात्मकता का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।